What Is Memorandum of Deposit of Title Deed (MODT) in Home Loan?
June 09, 2025 | 4 mins read
होम लोन केवल घर खरीदने का माध्यम नहीं है, बल्कि सही योजना के साथ यह टैक्स बचत का प्रभावी साधन भी बन सकता है। होम लोन टैक्स बचत और होम लोन टैक्स लाभ आयकर अधिनियम के विभिन्न सेक्शन के तहत उपलब्ध होते हैं। इस लेख में हम सेक्शन 80C और 24(b) के तहत मिलने वाली होम लोन टैक्स छूट, IT Act के नियम और FY 2025-26 के अनुसार अपडेटेड जानकारी समझेंगे।
होम लोन टैक्स लाभ मुख्य रूप से आयकर अधिनियम के कुछ प्रमुख सेक्शन के तहत उपलब्ध होते हैं। सेक्शन 80C टैक्स बेनिफिट होम लोन और 24(b) ब्याज पर टैक्स कटौती सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्रावधान हैं।
सेक्शन 80C के तहत होम लोन के “प्रिंसिपल” या “मूलधन” के पुनर्भुगतान पर ₹ 1.5 लाख तक की कटौती का दावा किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
यह सेक्शन 80C टैक्स छूट अन्य टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट्स के साथ संयुक्त सीमा में आता है।
24(b) ब्याज पर टैक्स कटौती के तहत स्वयं उपयोग की जाने वाली संपत्ति के लिए ₹ 2 लाख तक की वार्षिक ब्याज कटौती का लाभ मिल सकता है।
मुख्य शर्तें:
पहली बार घर खरीदने वालों को अतिरिक्त कटौती का लाभ मिल सकता है। यह कटौती केवल उन ग्राहकों के लिए उपलब्ध है जिनका लोन 31 मार्च 2022 से पहले स्वीकृत हुआ था। वर्तमान में FY 2025-26 के लिए नए लोन पर 80EEA का लाभ उपलब्ध नहीं है, जब तक कि सरकार इसे बजट में पुनः विस्तारित न करे।
होम लोन टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए उचित दस्तावेज और योजना आवश्यक है।
कुछ व्यावहारिक सुझाव:
वित्तीय योजना और टैक्स बचत साथ-साथ की जाए तो कुल लाभ अधिक हो सकता है।
होम लोन टैक्स बचत की योजना बनाते समय इन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए।
भारत होम लोन टैक्स नियम आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित किए गए हैं। IT Act में टैक्स नियम के अनुसार:
ITR फाइल करते समय बैंक द्वारा जारी ब्याज प्रमाणपत्र और भुगतान विवरण के आधार पर क्लेम किया जाता है। पात्रता आय, संपत्ति उपयोग और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है। नियम समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं, इसलिए नवीनतम प्रावधानों की जानकारी रखना आवश्यक है।
होम लोन टैक्स बचत को अधिकतम करने के लिए निम्न सुझाव अपनाए जा सकते हैं:
सही रणनीति से होम लोन टैक्स लाभ का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
होम लोन टैक्स बचत की योजना बनाते समय यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि:
म लोन न केवल आपको अपने सपनों का घर दिलाने में मदद करता है, बल्कि पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत सेक्शन 80C और 24(b) के माध्यम से आपकी टैक्स देनदारी को भी कम करता है। अपनी आय और निवेश के आधार पर सही टैक्स व्यवस्था का चुनाव करें।
टैक्स फाइल करने के लिए एल एंड टी फाइनेंस से अपना प्रोविजनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट लेना न भूलें, ताकि आप सटीक क्लेम कर सकें।
सेक्शन 80C और 24(b) के तहत मूलधन और ब्याज पर उपलब्ध कटौती का दावा करके होम लोन टैक्स बचत की जा सकती है।
सेक्शन 80C प्रिंसिपल पर कटौती देता है, जबकि सेक्शन 24(b) ब्याज भुगतान पर टैक्स लाभ प्रदान करता है।
हाँ, निर्धारित शर्तों के तहत सेक्शन 80EE या 80EEA के माध्यम से अतिरिक्त कटौती मिल सकती है।
प्रीपेमेंट से ब्याज भुगतान कम हो सकता है, जिससे कुल टैक्स कटौती की राशि प्रभावित हो सकती है।
हाँ, किराये पर दी गई संपत्ति के मामले में ब्याज पर अलग नियम लागू हो सकते हैं।
दोनों सह-आवेदक अपनी हिस्सेदारी के अनुसार अलग-अलग टैक्स लाभ का दावा कर सकते हैं।
सेक्शन 80C में ₹ 1.5 लाख और सेक्शन 24(b) में ₹ 2 लाख तक की वार्षिक कटौती सामान्यतः उपलब्ध होती है, शर्तों के अनुसार।
अस्वीकरण:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आयकर अधिनियम होम लोन छूट और भारत होम लोन टैक्स नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए कर सलाहकार से परामर्श करना उचित है।